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Mann

मन  बहुत कठिन है अभिव्यक्त करना अपने मन के भाव  मुश्किल है पर अन्दर रखना  बन जाएंगे वे घाव  इसिलिए तो है ये कलम  लिखती मन की बात  खुशी दुख अश्रु किलकारी  हर हाल में देती साथ कलम के पास आते ही मन हो जाता हल्का कागज़ पर भावों के उतरते ही दिल थोड़ा सा संभलता         फिर भी क्या हम लिख पाते हैं अंदर उठा सैलाब ?          बहुत कठिन है अभिव्यक्त करना अपने मन के भाव लिखती वही कलम जो मन उससे लिखवाता मन को सही गलत है सब समझ में आता         मन के अंदर भी एक मन है, मन पे मन का दबाव          बहुत कठिन है अभिव्यक्त करना अपने मन के भाव मन कभी मन को समझाता कलम कभी मन को समझाती जो बात है दोनों मन में क्यों  नहीं वो कलम से बह पाती         दोनों मन के मिलने से ही जीवन में आएगा ठहराव          बहुत कठिन है अभिव्यक्त करना अपने मन के भाव